यादों ने जख्मों को कुरेद के देखा.. नज़रों ने भीगी पलकों की ओट से देखा.. बेबस लाचार होकर शब्द चुप से हो गए.. हाँ !उन्हें सालों बाद हमने अपने शहर में देखा.. ~~~आशीष नौटियाल~~~
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