आज उनसे जो मिल लिए..
लगा मरे थे फिर जी लिए..
आँखों ने ही बात की बेइंतहा उनसे
ये होंठ मानो किसी ने सील दिए..
जमी धूल आंखों की फना हो गयी.
सामने जैसे कई सुरज चमक गए..
बोले हम क्या ,, क्या उसने सुना..
बस हम यादों में एक याद और जोड़ गए
~~~आशीष नौटियाल~~~
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