अवसादों का अब कहर कहर..
हर प्रहर प्रहर है जहर जहर..
स्थूल काया है बोझ बनी..
मन खोजे तुझे डगर डगर..
तुम नहीं अब ..पर तुम ही हो
मेरे ह्रदय सागर की लहर लहर.
हर पहर पहर है जहर जहर..
नहीं सहन प्रज्वल आग ये विरह की..
मत जाओ तुम जरा ठहर ठहर..
वाणी ने है मेरे मौन धरा..
पर नाम तेरा है मेरे अधर अधर..
अवसादों का अब कहर कहर..
हर पहर पहर है जहर जहर.
~~~~©आशीष नौटियाल~~~~
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