जन्म दिवस में राधा के कृष्ण ढूंढे उपहार..
ढूंढे से मिला नहीं .. छोटा पड़ा संसार..
रत्नाकर के रत्न के अब ना रहे मोल ..
राधा के सम्मुख फीके सारे वो अनमोल।
थक हार के राधा से कृष्ण खुद ही बोले..
तुम्ही बताओ अब दूं क्या तुम्हे..
जो तुम्हारे रूप को तोले ।।
हंसी राधा गरज से .कृष्ण को लगा दिया गले..
त्रिभुवन हो जिसकी बाँहों में उसे अब क्यों उपहार मिले।
..............आशीष नौटियाल...................
No comments:
Post a Comment