Tuesday, 3 July 2018

ना खिलाओ नवजात पुष्पों को

हे बसंत ना खिलाओ.
अब इन नवजात पुष्पों को..
ये देश अब गिद्दों का हो चला है.
नोंच दिए जाते हैं..
लूट लिए जाते हैं..
मासूमियत का यहां
इंसानियत गला घोटती है..
इनकी लांशों में है अब शतरंज की बिसाते..
जो चले ढंग से वो ही सत्ता पे नाचे..
पुष्पों का भी अब धर्म हो चला हैं..
नेता ने हर माली को यहाँ ऐसे ही छला है..
है बसंत ना ख़िलाओ
अब इन नवजात पुष्पों को
~~~आशीष नौटियाल~~~

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