तुम जो देखते हो मुझे..
खिलखिलाते हुए ,..
मस्ती में चूर , ज़िन्दगी जीते हुए..
शायद तुम्हें पता नही..
खाली कमरों में गूँज ज़्यादा होती है
~~~आशीष नौटियाल~~~
तुम जो देखते हो मुझे..
खिलखिलाते हुए ,..
मस्ती में चूर , ज़िन्दगी जीते हुए..
शायद तुम्हें पता नही..
खाली कमरों में गूँज ज़्यादा होती है
~~~आशीष नौटियाल~~~
ऐ हवाओं बेगैरत होकर ,
मुझ से रिश्वत ले लो.
और उड़ा के जुल्फे
उनके रुखसार से..
उनका दीदार करा दो.
~~आशीष नौटियाल~~
उसे इश्क था मुझ से
ये सच तो ना था..
पर अदाकारी इश्क की
वो उम्दा निभा गया ..
ना छोड़ा, ना लड़ा,
ना कुछ कहा मुझ से..
बन के बुत, हमारे रिश्ते को
बेसुरा साज कर गया.
इस साज मैं इश्क़ का गीत
हम गाते कैसे.
हम ही छोड़ चले ..
बन के वो वफादार
बेवफ़ा हमे कर गया.
~~आशीष नौटियाल~~
मेरे चेहरे पे अब कहाँ
खूबसूरती दिखती है...
और जो देखे मेरा दिल ,
वो नजर अब कहाँ मिलती है...
~~~आशीष नौटियाल~~~
लौट चले हैं परिंदे भी अब अपने
ठिकाने..
ऐ दिल तु भी लौट आ करके कुछ
बहाने..
क्यों है वहाँ जो है पराया,लगा है तुझे
सताने..
बसंत ले कर दे गया सावन ,आँखों को
भीगाने..
ऐ दिल तु भी लौट आ कर के कुछ
बहाने..
लौट चले हैं परिंदे भी अब अपने
ठिकाने..
~~आशीष नौटियाल~~