दुनियां की भीड़ में तेरा नामुमकिन है मिलना..
आ जाना मगर ख़्वाबों में, मेरे जगने से पहले
निकला हूँ अभी अभी ज़िन्दगी के सफर में
आ जाना मगर राहों में ,मेरे भटकने से पहले
आशीष ने समेटा है खुद को कई सदियों में..
आ जाना मगर इस जन्म,मेरे बिखरने से पहले.
~~~आशीष नौटियाल~~
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