Saturday, 25 August 2018

दुनियां की भीड़ में तेरा नामुमकिन है मिलना.. आ जाना मगर ख़्वाबों में, मेरे जगने से पहले निकला हूँ अभी अभी ज़िन्दगी के सफर में आ जाना मगर राहों में ,मेरे भटकने से पहले आशीष ने समेटा है खुद को कई सदियों में.. आ जाना मगर इस जन्म,मेरे बिखरने से पहले. ~~~आशीष नौटियाल~~

दुनियां की भीड़ में तेरा नामुमकिन है मिलना..
आ जाना मगर ख़्वाबों में, मेरे जगने से पहले

निकला हूँ अभी अभी ज़िन्दगी के सफर में
आ जाना मगर राहों में ,मेरे भटकने से पहले

आशीष ने समेटा है खुद को कई सदियों में..
आ जाना मगर इस जन्म,मेरे बिखरने से पहले.

~~~आशीष नौटियाल~~

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