Ashish nautiyal
Thursday, 2 August 2018
मेरे बंजर दिल मे आकर बरस तो गए हो.. दलदली ज़मीं से खुद को अब निकालोगे कैसे.. ~~~आशीष नौटियाल~~~
मेरे बंजर दिल मे आकर बरस तो गए हो..
दलदली ज़मीं से खुद को अब निकालोगे कैसे..
~~~आशीष नौटियाल~~~
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