Thursday, 16 August 2018

अटल जी की अनंत यात्रा

सिंधु रो रहा .
धरा का हर बिंदु रो रहा..
धूमिल है सूर्य आज.
चन्द्र ओज ढूंढ रहा..
भारती विलाप से है छाती पिटती.
उसका "अटल" आज अंनत जा रहा
~~~आशीष नौटियाल~~~

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