उसे इश्क था मुझ से
ये सच तो ना था..
पर अदाकारी इश्क की
वो उम्दा निभा गया ..
ना छोड़ा, ना लड़ा,
ना कुछ कहा मुझ से..
बन के बुत, हमारे रिश्ते को
बेसुरा साज कर गया.
इस साज मैं इश्क़ का गीत
हम गाते कैसे.
हम ही छोड़ चले ..
बन के वो वफादार
बेवफ़ा हमे कर गया.
~~आशीष नौटियाल~~
No comments:
Post a Comment