लौट चले हैं परिंदे भी अब अपने
ठिकाने..
ऐ दिल तु भी लौट आ करके कुछ
बहाने..
क्यों है वहाँ जो है पराया,लगा है तुझे
सताने..
बसंत ले कर दे गया सावन ,आँखों को
भीगाने..
ऐ दिल तु भी लौट आ कर के कुछ
बहाने..
लौट चले हैं परिंदे भी अब अपने
ठिकाने..
~~आशीष नौटियाल~~
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