Friday, 12 October 2018

माँ सा

रिवायतों से देखा
तेरा मजहब,लिबास
खुद से अलग पाया..
ईमानदार सीरत से देखा
तेरा चेहरा हर नक्श से
अपनी माँ सा पाया..
~~~आशीष नौटियाल~~~

No comments:

Post a Comment