श्याह रात, बुझे चिराग, लापता चाँद.. गुमराह तारे.. अँधेरा पुनः जीवित हो चला..
जगे दर्द घाव हरे रूठी नींद आँसू बहे विरह का जहर चढ़ चला.
~~~आशीष नौटियाल~~~
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